Published on: 16 Oct 2026
**
मीरपुर: इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय (आईजीयू), मीरपुर के भौतिकी विभाग एवं बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में पूर्व राष्ट्रपति ‘मिसाइल मैन’ डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम की जयंती के अवसर पर विज्ञान पोस्टर प्रस्तुति एवं नवाचारी वैज्ञानिक मॉडलों की एक दिवसीय अंतर-विभागीय कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, रचनात्मकता, नवाचार तथा अनुसंधानपरक सोच को प्रोत्साहित करना था।
कार्यशाला के अवसर पर विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. असीम मिगलानी ने आयोजन समिति, संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों को अपनी शुभकामनाएँ देते हुए संदेश दिया कि डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम जी का जीवन प्रत्येक विद्यार्थी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। इस प्रकार की कार्यशालाएँ न केवल छात्रों की वैज्ञानिक प्रतिभा और रचनात्मकता को मंच प्रदान करती हैं, बल्कि उनके भीतर अनुसंधान व बौद्धिक संपदा (IPR) के प्रति जागरूकता भी पैदा करती हैं। विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सदैव प्रतिबद्ध है।
कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. दिलबाग सिंह ने किया। उन्होंने डॉ. कलाम से हुई अपनी व्यक्तिगत मुलाकात को याद करते हुए उनके सरल, विनम्र एवं प्रेरणादायक व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला तथा विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान खोजने के लिए प्रेरित किया। वहीं डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. सुनील कुमार ने रामेश्वरम स्थित डॉ. कलाम के निवास स्थान के अपने संस्मरण साझा करते हुए उनके साधारण पृष्ठभूमि से सफलता के शिखर तक पहुँचने की असाधारण यात्रा का उल्लेख किया।
कार्यशाला में विभिन्न विभागों के लगभग 100 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिसमें 61 टीमों ने विज्ञान पोस्टर तथा 10 टीमों ने अपने नवाचारी मॉडलों का प्रदर्शन किया। प्रो. सतिंदर बल गुप्ता, प्रो. रश्मि पुंडीर एवं श्री सतीश कुमार के प्रतिष्ठित निर्णायक मंडल द्वारा किए गए मूल्यांकन में Poster Presentation में “इलेक्ट्रोमॉर्फिक कंप्यूटिंग: मस्तिष्क से प्रेरित संगणना” (Electromorphic Computing) तथा Scientific Model में “कार्बन-नकारात्मक धुआँरहित चूल्हा” (Carbon-Negative Smokeless Stove) ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।
समापन सत्र की अध्यक्षता छात्र कल्याण अधिष्ठाता (DSW) प्रो. करण सिंह ने की। उन्होंने विजेताओं को पुरस्कार व स्मृति-चिह्न प्रदान किए और डॉ. कलाम के प्रसिद्ध कथन— “सपने वे नहीं जो आप सोते हुए देखते हैं, सपने वे हैं जो आपको सोने नहीं देते”—के माध्यम से विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए कठिन परिश्रम करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. कविता यादव ने विश्वविद्यालय प्रशासन, निर्णायक मंडल, आयोजन समिति के सदस्यों एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के अध्यक्ष, प्राध्यापक, शोधार्थी व छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। यह आयोजन डॉ. कलाम की अमिट विरासत के प्रति एक सार्थक एवं भावपूर्ण श्रद्धांजलि साबित हुआ।